आज के चुनावी
माहौल को नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से हाईजैक कर लिया है यह शर्मनाक है. मीडिया का
बडबोलापन और जनता की बेबसी यही दो ताकते हैं जो लोकतंत्र को शर्मशार करने के लिए
काफी थे.. अब एक और प्रथा जन्म ले चुकी है.. व्यक्तिवादी राजनीती. मुझे यह कतई
उम्मीद नहीं थी, की एक व्यक्ति इतना बड़ा हो जायेगा की पूरा हिंदुस्तान उसके बारे
में ही बात करेगा. चाहे पक्ष में अथवा विपक्ष में. और देश हित, जन कल्याण,
लोकतंत्र, राजनीती ये सब दोयम दर्जे के मामले हो जायेंगे. आखिर कौन जिम्मेदार है
इस पूरे मामले के लिए?
मेरी नजर में सिर्फ
तीन के ऊपर ये जिम्मेदारी जाती है.
१.
पूँजी
२.
मीडिया
३.
राजनैतिक दिवालियापन

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