
पटना , २९ मार्च ।
शरद जी ने रविवार को कहा की भारत के जिन लोगों ने स्विस बैंक में रुपए जमा किए हैं , भारत सरकार उनके नाम का तुंरत पता लगाये। इस बारे में वो सर्व दलीय बैठक करे और जरूरत पड़ने पर वो तमाम दूसरे देशों की मदद ले । शरद जी ने इस बात पर चिंता जताई की स्विस बैंक में सबसे ज्यादा धन भारत से जमा हुआ है। यह काला धन है। भ्रष्टाचार के जरिये कला धन जमा किया गया है। उन्होंने कहा की अमेरिका समेत कई ताकतवर देशों के दबाव में क़ानून बना और स्विस बैंक को यह बतलाना जरूरी हो गया की किस देश से कितने रुपए जमा किए गए हैं। एक साल सात महीने पहले यह खुलाशा हुआ की स्विस बैंक में सबसे ज्यादा धन भारत से जमा हुआ है। ४५६ बीलीयान डॉलर यानि ७२ लाख ८० हजार करोड़रुपए स्विस बैंक में जमा हुए हैं । शरद जी ने इस धन को कला धन करार दिया है। शरद जी ने कहा की भारत ने दूसरे देशों से जितना कर्ज लिया है ये धन उससे तीन गुना है । यह धन देश के बजट का ८ गुना है । ६० साल से कुछ लोग देश को लूटने में लगे हैं और अब तक लूटने में लगे हैं और अपने लूट का धन स्विस बैंक में रख रहे हैं। शरद जी अचरज में थे की , जिस देश के ७८ % लोग २० रुपए रोज पर गुजारा करते हैं , वह देश स्विस बैंक में रुपए जमा करने में सबसे आगे है ,अव्वल है। प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह जी इमानदार हैं ऐसा कहा जाता है... वह उन लोगों के नाम और पते का खुलासा करे जिनहोने स्विस बैंक में पैसे जमा किए हैं। कौन लोग कितनी बार कहाँ कहाँ गए हैं इसकी पड़ताल होनी चाहिए। इस मुद्दे पर जो पार्टी चुप है , उसके पीछे की वजह का पता लगना जरूरी है। उन्होंने कहा की पार्टियों को इस मुद्दे पर गंभीर होना चाहिए । इसके विरोध में हमें गोलबंद होना चाहिए । यह मुद्दा भ्रष्टाचार से जुड़ता है । भ्रष्टाचार बढ़ा है ।
दिल्ली, ३१ मार्चशरद जी की यह पुकार उस हर व्यक्ति के लिए है जिनकी जिंदगी हर तरह की परेशानिओं में घिरी रही लेकिन उनके द्वारा चुने गए उनके प्रतिनिधिओं के द्वारा जमा किए गए धन से स्विस बैंक में धन का अद्वितीय अम्बार लगता चला गया... मैं जानता हूँ की शरद जी ने यहाँ जो कहा वो बिल्कुल सत्य है की लोग ६० वर्षों से अधिक समय से देश को लूटते आ रहे हैं...
अब जनता को जागना होगा.... आज के वक्त में जनता को अपनी वोट की ताकत को समझना बहूत जरूरी है... पहले राजा अपनी माँ की पेट से पैदा होता था और यही सामंती व्यवस्था है..... अब राजा आपके वोट से पैदा होता है ...यही लोक तंत्र है... आपका वोट ही आज के आपके राजा का माई- बाप है ...
आप जनता हैं... आप जनार्दन हैं.... आप तो सब जानते हैं... आपसे क्या छुपा है..? वो लोग जो आज करोड़पति बने बैठे हैं... कल उनके पास खाने को रोटी तक नही थी... रहने को घर नही था... जब वो आपके प्रतिनिधि नही थे... प्रतिनिधि बनने के बाद अचानक उनकी औकात करोड़पति की कैसे हो गई ?
जरा सोंचिये ....सरकार ने उनकी सेवाओं के लिए उन्हें पुरस्कृत किया नही... आपने उन्हें भेंट स्वरुप कुछ दिया नही... फ़िर उनकेपास इतना धन आया कहाँ से ?
जाहिर है सरकार के द्वारा जो पैसे आपके ऊपर खर्च करने थे वो उन्होंने अपनी बैंक खतों में जमा किए और करते ही चले गए... क्या ये सोंचने का विषय नही की ऐसी कौन सी ललक है इन लोगों में की समाज सेवा के नाम पर राजनीत करने आए और आपके प्रतिनिधि होने के मजबूत दावेदार कहलाने के नाम पर इन लोगों ने करोड़ों रुपए चुनाओ में खर्च करने शुरू कर दिए ? जाहिर है की आज के समय में चुनाव एक व्यवसाय का रूप बन गया है... जहाँ लोग पहले इन्वेस्ट करते हैं और फ़िर मुनाफे समेत अपना धन बटोर लेते हैं.... ५ साल की अवधी में जितना बन पड़ता है लूट लेते हैं... आखीर कहाँ से लाते हैं ये इतने रुपए चुनाव लड़ने में खर्च करने के लिए...?
ये सरकारी सेवक भी कम नही हैं... ये भी आपके ही पैसों से साहब वाली ठाठ बाठ मेंटेन करते हैं.... आपके ही पैसों से ये आपके ऊपर बाबू साहब बन कर बैठे होते हैं... वरना आप तो जानते ही हैं की महीने भर की तनख्वाह में ठीक से घर भी नही चल सकता... लातसाहबी तो दूर की बात है... यानि जिसे जहाँ मौका मिला ... आपको लूटता चला गया....
डा० हरिवंश राय बच्चन ने लिखा था... "अफसर, दफ्तर, फाइल, नोट, सबसे ताकतवर है वोट..." ये याद रखने की चीज है... बस...
जरा सोंचिये... आपका रजा आपके द्वारा चुना जाता है.... यही लोक तंत्र है... तो फ़िर क्या ये आपका अधिकार नही बनता की आप अपने चुने हुए रजा से ये पूछें की ये धन उसने कहाँ से जमा किया...? और आपकी स्थिति बदहाल की बदहाल ही क्यों बनी रह गई ? आपका आपके राजा से हिसाब मांगने का पूरा हक है... हो सकता है की ... वो आम दिनों में आपकी बात को अनसुना कर दें... लेकिन चुनाव के वक्त आप उस से जरूर पूछेंगे और उसको जवाब देना ही होगा...
खैर जवाब से क्या मिलेगा...? वो तो जो खाना था खा चुका... जितना जमा करना था कर चुका... जरा सोंचिये ... जिनके पास रहने को घर नही था... खाने को रोटी नही नसीब होती थी... वो आज बड़े गर्व से घोषणा करता है की मेरे पास तो सिर्फ़ कुछ करोड़ों की संपत्ति है... और आपको यह विश्वास दिलाता है... की उसने पूरी ईमानदारी से अपना व अपनी संपत्ति का ब्यौरा दे दिया है... सवाल ये उठता है ...की ये संपत्ति तो पहले थी नही ... फ़िर अब कहाँ से आ गई...? अचानक से लोग खानदानी रईस दिखने लगते हैं.... ?
खैर... ये हाल तो चारो तरफ़ है... आप किसे अपना प्रतिनिधि चुनेंगे... ये कैसे तय करेंगे...? वादों ... नारों के नाम पर वोट देने का न तो अब समय रहा है... न आपके नेता आपके हितैषी ही रहे हैं...
कुछ लोग अभी भी बचे हैं... जो गाहे बगाहे आपको जगाने की कोशिश करते हैं.....चाहे सेज जैसे मुद्दे हों या फ़िर विदेशों में धन जमा कर धन्ना सेठ बन कर बैठे होने का मामला हो... पर आप जागें तब न ?
मेरे हिसाब से अपना प्रतिनिधि चुनना बिल्कुल आसान है.... आप सिर्फ़ उसको ही अपना प्रतिनिधि चुने... जिसपर व्यक्तिगत रूप से आपको भरोसा हो...
यह याद रखें ... अगर किसी नें आपके भरोसे को एक बार तोड़ दिया है... तो बार बार भरोसा करने से वो सुधर जाएगा ऐसा बिल्कुल मत सोंचिये... ये अवसरवादी राजनीती है... लोग आपको अपने वादों और मगरमछी आंसुओं के फांस में फांसने में सिद्ध हस्त हैं इसी लिए वर्षों से आपके धन से ही मालामाल होते रहे हैं...
ये नोट कमाने की ही माया है की लोग धड़ल्ले से पार्टियाँ बदलने से भी परहेज नही करते... ताल - मेल में भी परहेज नही करते... मुद्दा सिर्फ़ एक है... खाओ और खाने दो... सब मिलें सब खाएं... कोई वैचारिक पृष्ठभूमि नही... कोई नैतिकता नही... बस कुर्सी और गद्दी... अगर कुछ रह गया तो वो आपका वोट... जो इन्हे भरोसा होता है... की वो तो आंसू बहा बहा कर मिल ही जाएगा... बेचारी पब्लिक करेगी ही क्या... कोई आप्शन भी तो नही जनता के पास... ?
विकल्प है कैसे नही... एक बार जरा खखार के पूछिए ..." हाँ भाई... क्या किए आज तक ....? पिछला बार जितना वादा किए उसको छोड़ दीजिये... ये बतलाईये की आपकी माली हालत पहले से बेहतर हुई की नही...? इस बार चुनाव में कितना खर्च कर रहे हैं...?" या फ़िर आपके ग्राम या मुहल्ले या छेत्र की चौहद्दी ही पूछ लीजिये... लीडर बनने वालों के होश फाख्ता हो जायेंगे मैं शर्त लगा कर कह सकता हूँ...
वैसे आपसे कुछ छुपा भी नही है... जिनकी माली हालत में सुधर दिखे.... उन पर विशेष दृष्टी रखने की जरूरत है... वैसे गुदरी ओढ़ कर घी पीने वाले भी भरे पड़े हैं.... लेकिन इन सब का एक ही इलाज है... काम देखिये... और अपनी अंतरात्मा से फ़ैसला कीजिये... ।
क्या वजह है की कोई गरीब आदमी जो समाज सेवा के रूप में आपकी मदद कर रहा हो ... लाख परेशानिओं को उठा कर भी वो आपकी आवाज बन रहा हो .... आप उसको चुन कर सदन में भेजने की हिम्मत नही उठा पाते ? ... और उनको ही बार बार चुनते हैं... जो वर्षों से आपको लूटते आ रहे हैं....? वजह साफ़ है...
आपका भोलापन ... भोलेनाथ हैं आपलोग... और भस्मासुर हैं ये आपके चुने हुए नुमाईंदे ...आप लहर देखते हैं... कौन जीत रहा है वो देखते हैं... इन अफवाहों में पड़ते हैं... अपनी अंतरात्मा की नही सुनते....
आप एक काम कीजिये...आप जात - पात...धर्म-समुदाय ... पार्टी - दल ... बाहुबली- दबंग इनके नाम पर वोट देना बंद कर दीजिये.... आप सिर्फ़ अपने दिल की आवाज सुनिए ...मैं आश्वस्त हूँ की आप धोखा नही खायेंगे ... आप काम देखिये... अपने नेता की पहचान हर किसी को होती है... किसी के मनवाने से अगर कोई नेता बन गया होता तो ... इस देश में दिग्गज कभी हारते ही नही ... किसी की शकल देख कर ही आपको समझ में आ जाता है की अमुक आदमी आपको धोका देगा...ये दिल ही गवाही दे देता है... आप भी जानते हैं इस बात को ... फ़िर ऐसी कौन सी मजबूरी होती है की हमेशा बेईमान लोग आपको लूट लेते हैं और करोड़ पति बन जाते हैं... और आप अपनी समस्याओं में उलझे हुए... इन लोगों की बात में बार बार आ जाते हैं... या ये अद्वितीय किस्म के चालबाज है....और अव्वल दर्जे के धूर्त हैं...?
बातों पर कम और अपनी अन्तर आत्मा की आवाज पर ज्यादा भरोसा कीजिये.... लोग करोड़ों इस लिए खर्च करते हैं ताकि वो लहर बना सकें की वो जीत रहे हैं... और आपको वो ये अहसास दिलाना चाहते हैं की उनको ही वोट कर देना चाहिए ... नही तो आपका वोट बर्बाद हो जाएगा....ऐसा वो आपको गुमराह करने के लिए करते हैं...ये आपको गुमराह करने के लिए करोडो खर्च करते हैं...
याद रखिये जिस दिन आप ये समझ गए की आपका राजा आपकी मर्जी से चुना जाना है और सिर्फ़ आपको ही चुनना है... उस दिन आपके इमानदार हाथ सिर्फ़ उसको वोट देंगे जो आपका सच्चा प्रतिनिधि होगा...और लोगों की बातों और नारों में फंसने की बजाये ... अपनी इमानदार कोशिश कीजिये बदलाव लाने की... ... क्योंकि आज तक आपकी स्थिति सुधरी नही... सुधरने के बजाये और बदतर हो गई... जाहिर है... की बदलाव की कूंजी आपके ही हाथ में है... आपके वोट की शकल में...
खैर... आप ख़ुद समझदार हैं...
बिल्ली को दूध की रखवाली करने बोलेंगे तो क्या होगा...?
अब भी वक्त है... सोंचिये... इस देश को लूटने वालों को फिर राजा बनायेंगे या कुछ परिवर्तन लाना है...?
